सप्ताह भर चलने वाली 20वीं चाइनीझ कोम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की कांग्रेस 22 अक्टूबर को बीजिंग में संपन्न हुई। यह कॉंग्रेस वैसे कई मायनों में एक महत्वपूर्ण घटना थी परंतु एक महत्वपूर्ण एवं जिसका प्रभाव समग्र विश्वमें होनेवाला है ऐसी घटना थी जब शी जिनपिंग ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के महासचिव के रूप में चीन के सबसे शक्तिशाली पद पर अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया । 1976 में माओ की मृत्यु के बाद से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर उनका बने रहना अभूतपूर्व होगा। आज माओ के बाद इतने 'सम्मानित' होनेवाले नेता (आदरणीय लिंगशुई) दूसरे नेता होंगे। शी जिनपिंगका महासचिव बनना आम सहमति से निर्णय लेने की सीसीपी की प्रथा को प्रभावी ढंग से समाप्त कर देगा।
ग्रेट हॉल ऑफ पिपल में उपस्थित 2,340 प्रतिनिधियों और 83 विशेष रूप से आमंत्रित सेवानिवृत्त वयोवृद्ध कैडरों के सामने अपना कार्य रिपोर्ट कुल मिलाकर 72 पृष्ठो में 33,273 चाइनिझ शब्दों में प्रस्तुत करते हुए और प्रतिकूल अंतरराष्ट्रीय वातावरण से अवगत होते हुए शी, लोगों के ग्रेट हॉल में इकट्ठे हुए, विवादित एवं घर्षण हो ऐसे बयान से परहेज किया।
शी जिनपिंग के भाषण के मुख्य अंश:
1. अमेरिका और चीन : शी जिनपिंगने ग्रेट हॉल ऑफ पिपल में उपस्थित स्थानिक नेताओ एवं दर्शको के समक्ष विश्वास जताते हुए घोषणा करते हुए कहा इस सदी के मध्य तक चीन "वैज्ञानिक समाजवाद" और "चाइनीज समज" के आधार पर "मानवता का एक नया विकल्प प्रदान कराते हुए" एक महत्वपूर्ण वैश्विक ताकत बन जाएगा। शी ने 2012 और 2017 के दो कॉंग्रेस में निर्धारित लक्ष्य, जिसमें "चीनी राष्ट्र का कायाकल्प" शामिल है को दोहराया, जिसका अर्थ ऐसा किया जा सकता है की चीन द्वारा जिन क्षेत्रो पर दावा किया जाता रहा है उन क्षेत्रों को चीन में शामिल करके वैश्विक शक्ति के रूप में अमेरिका को पीछे छोड़ देगा।
2. सुरक्षा का राग : शी जिनपिंगने चीन के सामने खड़ी चुनौतियाँ और चीन को अस्थिर करनेवाली एवं CCP को तोड़नेवाली विदेशी ताकतों को नजरअंदाज नहीं किया। अमेरिका का नाम लिए बिना शीने "ब्लेकमेल करने, रोकने नाकाबंदी करबे एवं चीन पर अधिकतम बाहरी दबाव डालने के बाहरी प्रयासों" का उल्लेख किया, साथ ही यह घोषणा की के "चीन दबाव और शक्ति के सामने कभी जुकेगा नहीं" जिनपिंगने जब यह घोषणा की तब विश्व के सामने यह आशंका सामने आई कि "चीन विदेशी प्रतिबंधों एवं अन्य शक्तियों द्वारा अपने मामलों में हस्तक्षेप का मुक़ाबला करने के लिए तंत्र को मजबूत करेगा"। वास्तव में, राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में चिंता, जिसे चीनी नेताओं द्वारा अक्सर व्यक्त किया गया है, पूरी रिपोर्ट में स्पष्ट थी, जिसमें 91 बार अभूतपूर्व 'सुरक्षा' का उल्लेख किया गया था, जो कि 2017 की उनकी पिछली रिपोर्ट में केवल 42 बार उल्लेखित किया गया था उसके ठीक विपरीत था। पार्टी की विश्वसनीयता को कम होने सेरोकने के लिए, शी ने वैचारिक स्पष्टता को लागू करने के बारे में असामान्य रूप से, विशेष रूप से उच्च पदस्थ कार्यकर्ताओं के बीच कुंद संदर्भ दिए। इस से ऐसा जाहीर होता दिख रहा था कि भ्रष्टाचार को खत्म करना प्राथमिकता है। इस वर्ष जो क्षेत्रो में चीन पैसा और जनशक्ति का निवेश करता है उनकि ओर प्राथमिकता दर्शाते, तीन नए सेक्शन्स, विज्ञान और टेक्नोलोजी, इनोवेशन और सिक्यूरिटी,पेश किए गए। अमेरिका द्वारा हाइ-टेक सेमीकंडक्टर्स, माइक्रोप्रोसेसर्स आदि कि बिक्री पर लगाए गये प्रतिबंधों के मद्दे नजर खास कर के पहेले दो महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
3. रीफ़ोर्म्स को डाला ठंडे बस्ते मे : CCP कि इस कॉंग्रेस में कोई नीतिगत बदलाव कि घोषणा नहीं कि गई जो यह दर्शाता है कि शी कि "झीरों कोविड" सहित सभी नीतिओ को पार्टी का समर्थन है। 2017 की तुलना में शी ने आधे आर्थिक सुधारों का संदर्भ देकर यह संकेत दिया कि वो आर्थिक मंदी के प्रभाव से लोगोंमे उत्पन्न हुए आक्रोश को कम आंक रहे है। उन्होंने फिर भी जोर देकर, फिर से अमेरिका नाम लिए बिना कहा कि "आधिपत्य, उच्चस्तरीय बदमाशी" के बावजूद - चीन "बाहरी दुनिया के लिए खोलने" के लिए प्रतिबद्ध है और "एक खुली वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण में अपने हिस्से का योगदान देगा"।
4. चिंताजनक बयानबाजी : चीन के पड़ोसि देश जिनके साथ चीन के सीमा विवाद है, जिनको चीन "एक चीन" का हिस्सा समजता है उन पर और सेना पर शी की टिप्पणियों का, खास कर के पिछले कुछ समय से ताईवान पर जो स्थिति बनी हुई है उससे, ताईवान पर टिप्पणी का विशेष महत्व है। शीने ताइवान पर अडिग रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा, "हमारे देश के पूर्ण एकीकरण को महसूस किया जाना चाहिए जो हो कर रहेगा और इसे बिना किसी संदेह के महसूस किया जा सकता है"। जिनपिंगने जब कहा "उनके कार्यकाल के दौरान चीन के पूर्णएकीकरण की लिए प्रयास किया जाएगा" ग्रेट हॉल ऑफ पीपल तालियों की गड़गड़ाट से गूंज उठा, उन्होने धमकी भरे स्वर में कहा " हम कभी बलप्रयोग नहीं करने का वादा नहीं करेंगे"
जिनपिंगने दोहराया की वर्ष 2027 तक चाइनीझ आर्मी (PLA) इस शताब्दी की विश्वस्तरीय सेना बन जाएगी।उन्होंने आगे कहा कि चीनी सशस्त्र बलों को मशीनीकरण, इन्फॉर्मेशन और स्मार्ट टेक्नोलोजी के अनुप्रयोग के माध्यम से ओर मजबूत किया जाएगा। यह रिपोर्ट यह खुलासा करता है की चीन अपने परमाणु हथियारों को बढ़ा रहा है, इसकी पुष्टि कराते हुए शी जिनपिंगने खुलासा किया कि "रणनीतिक अवरोध कि एक मजबूत प्रणाली" को स्थापित किया जाएगा, साथ साथ "नई लड़ाकू क्षमताओ के साथ नए डोमेनबलों" की शुरुआत की जाएगी। शी ने संकेत दिया की चाइनीझ आर्मी (PLA) के पीएलए सपोर्ट फोर्स और पीएलए रॉकेट फोर्स को उन्नत लड़ाकू क्षमताओं के साथ बढ़ाया जाएगा। इस रिपोर्ट में एक विशेष दावा किया गया है की पीएलए का आधुनिकीकरण चीन को "उसकी सुरक्षा स्थिति को आकर देने के लिए संकटों और संघर्षो को रोकने और प्रबंधित करने तथा स्थानीय युद्ध जीतने में" सक्षम करेगा। "स्थानीय युद्ध" यह शब्द भारत और ताईवान के संदर्भ में काफी महत्व रखता है क्योंकि पिछली रिपोर्ट में इस शब्द का कोई उल्लेख नहीं था और इस रिपोर्ट मे इस शब्द का होना भारत और ताईवान के साथ चीन के संघर्ष की स्थिति को ध्यान में रखकर प्रयोग किया गया है। लद्दाख में हुए संघर्ष और तिब्बत में चीन के द्वारा रक्षा मामले में जिस तरह से बुनियादी ढांचे एवं सुविधाओं का विस्तार और मजबूत किया जा रहा है, और ग्रेट हॉल ऑफ पिपल में उपस्थित 2,340 प्रतिनिधियों और 83 विशेष रूप से आमंत्रित सेवानिवृत्त वयोवृद्ध कैडरों के सामने गलवान में हुई चीनी सैनिको के साठा भारतीय सैनिकोकी झड़प का विडियो जिस तरह से दिखाया गया, उसकी पृष्ठभ्मि में देखते हुए भारत की द्रष्टि में इस शब्दों का बहुत महत्व रखता है। इस शब्दों का प्रयोग यह भी इंगित करता है की चीन भारत के साथ लंबी अवधि के लिए तनावपूर्ण संबंधो के लिए तैयार है और इसकी अनुमति भी इस सीसीपी की कॉंग्रेस में ले चुका है। जिनपिंग के वक्तव्य का यह भाग भारत के साथ चीन के दीर्घकालीक तनावपूर्ण संबंधो की समस्या रहेने का अंदेशा देता है।

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