शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

भारतीय अवकाश सीमाओं की सुरक्षा : चीन की मिसाइलों की पहचान


                   

दिनांक 5/10/2018 को भारत ने अमेरिका के दबाव को दरकिनार करते रशिया के साथ एस-400 के सौदे को अंतिम स्वरुप दिया।
आखिर क्यों जरुरी है S-400 सुरक्षा प्रणाली भारत के लिए ?
भारत के पडोस में चीन एक ताकतवर राष्ट्र बनकर उभरा है, न केवल आर्थिक रूप से परंतु लश्करी द्रष्टी से भी चीन एक ताकतवर राष्ट्र माना जा रहा है। चीन की बढ़ती ताकत को नजरंदाज करना भारत के भविष्य के लिए खतरा साबित हो सकता है। पिछले वर्ष डोकलाम विवाद के बाद और बार बार भारतीय सीमाओं में घुसखोरी करने वाले चीन पर विश्वास नहीं कीया जाना चाहिए क्यों कि चीन के साथ हम एक युद्ध 1962 का हार चुके हैं, उस युद्ध से चीन हमारी जमीन हडप कर बैठा है।
1962 में जब चीन को भारत से कोई ख़तरा नहीं था तब हमारे उपर युद्ध थोप दिया था तो आज और आनेवाले भविष्य में भारत चीन का वैश्विक प्रतिद्वंद्वी बनकर उभर रहा है तब धोखेबाज चीन से चौकन्ने और सतर्क रहना तथा साथ साथ अपनी सैन्य ताकत बढ़ाना भारत के लिए अतिआवश्यक हो गया है।
इस श्रेणी प्रथम भाग दिनांक 5/10/2018 के अंक में पाकिस्तान की मिसाइलों का परिचय दिया था, आज चीन की मिसाइलों का परिचय करते हैं
  • 1. डोंग फेंग 4 (DF-4) : डोंग फेंग 4 1980 से चाइनीज सेना People’s Liberation Army (PLA) से शामिल हैं जिसे 2005 में निवृत्त कीया जाना था लेकिन एक ब्रिगेड हेनन प्रांत के लिंगबाओ में आज भी इसे ओपरेट करती है। करीब 22000 किलोग्राम वजन वाली, दो स्टेज, प्रवाही प्रोपेलेंट इंजन से संचालित है। इसकी मारक क्षमता 4500-5000 किलोमीटर तक की है। अंतर्देशीय से आंतरखंडिय मिसाइल अपने साथ 2200 किलोग्राम वजन के हथियारों का वहन करने में सक्षम है तथा 1-3 मेगाटन परमाणु हथियार भी वार करने में सक्षम है।
  • 2. डोंग फेंग 11 (DF-11) : 1992 से चीन की सेना में शामिल यह मिसाइल 280-300 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं, अपने 3800 किलोग्राम वजन के साथ यह मिसाइल 500-800 किलोग्राम तक के एकल वोरहेड को ले जाने के लिए सक्षम है। DF-11 परमाणु हथियार भी वार करने में सक्षम है। इसी मिसाइल का M11 वर्जन निर्यात कीया जाता है। पाकिस्तान की शाहिन मिसाइल श्रेणी इस की नकल माना जाता है।
  • 3. डोंग फेंग 21 ( DF 21/CSS -5) : डोंग फेंग 21 चीन की पहली मध्यम दूरी की रोड मोबाइल बैलेस्टिक मिसाइल है। 1991 में पीपल्स लिबरेशन आर्मी में शामिल किया गया था। 14700 किलोग्राम वजन वाली यह मिसाइल एक साथ 600 किलोग्राम हथियार या 250-500 kT परमाणु हथियार 2150 किलोमीटर तक वार करने की क्षमता रखती है।
  • 4. डोंग फेंग 31 (DF-31/DF-31A/CSS-10) : वर्ष 2006 में चाइनीज सेना में शामिल की गई 42000 वजन वाली, 8000-11700 किलोमीटर तक की दूरी तक प्रहार करने की क्षमता रखती यह आंतरखंडिय मिसाइल है। तीन स्टेज घन ईंधन प्रोपेलेंट से संचालित यह मिसाइल 1-3 mt परमाणु हथियार दागने में भी सक्षम है। PLA ने DF-31 का अपग्रेड वर्जन विकसित किया है जिसे DF-31A या CSS-10 मोड 2 नाम से जाना जाता है। DF-31A को 1990 में विकसित किया गया, 1999 में परीक्षण कीए गये और 2007 से सेना में डिप्लोय किया गया। इस मिसाइल की मारक क्षमता 11000 किलोमीटर तक की है।
  • 5. डोंग फेंग 26 (DF – 26) : DF – 26 चीन की ही DF – 21 मध्यम रेंज बैलेस्टिक मिसाइल का संवर्धित लंबी दूरी तक प्रहार करने वाली इन्टरमीडिएट रेंज बैलेस्टिक मिसाइल है। यह मिसाइल 3000 – 4000 किलोमीटर तक की दूरी पर प्रहार करने में सक्षम है और इसे 1200 – 1800 किलोग्राम पारंपरिक हथियारों का जखीरा वहन करने में सक्षम है इसके अलावा परमाणु हथियार से भी लैस किया जा सकता है।
  • 6. डोंग फेंग 5 (CSS – 4 मोड 2) : चीन की यह आंतरखंडिय (ICBM) मिसाइल है जिसका विकास 1966 से शुरू किया गया था। 13000 किलोमीटर से अधिक वार करने की क्षमता रखती इस मिसाइल को 1981 में चाइनीज सेना में शामिल किया गया।
  • 7. डोंग फेंग 5B (CSS – 4 मोड 3) डोंग फेंग 5B मिसाइल डोंग फेंग 5 की संवर्धित आवृत्ति है, इसकी सटीकता में 300 मीटर CEP की बढ़ोतरी हुई है। यह मिसाइल प्रवाही इंधन प्रोपेलेंट संचालित आंतरखंडिय मिसाइल है। डोंग फेंग 5B का भौतिक आकार डोंग फेंग 5 जैसा ही है परंतु इसे MIRVed (Multiple independent Targetable Reentry Vehicle) वोरहेड के वहन के लिए सक्षम किया गया है। वर्ष 2016 में मिली जानकारी के अनुसार चीन के पास 10 DF-5 लोंचर्स और 30 वोरहेडस है।
  • 8. डोंग फेंग 5C : 21 जनवरी 2017 में ऐसी रिपोर्ट बाहर आई की चीन ने अपने मिसाइल डोंग फेंग 5B के संशोधित संस्करण डोंग फेंग 5-C का परीक्षण किया है जो 10 MIRV से लैस किया गया है जो पुराने डोंग फेंग 5B में लगे 3 MIRV वोरहेड से कहीं ज्यादा है।
(अन्य चाइनीज मिसाइलों की जानकारी अगले अंक में प्रकाशित होगी)
कुछ चाइनीज मिसाइलों की जानकारी को देखते हुए यह कहने में किसी भी प्रकार की हिचकिचाहट नहीं होती कि भारत के पास अपनी हवाई सीमाओं तथा सभी सीमाओं की सुरक्षा करना अनिवार्य है और इसके लिए रशिया द्वारा विकसित एवं निर्मित S-400 जैसी सुरक्षा प्रणाली का होना बहुत ही आवश्यक है।
क्रमशः

3 टिप्‍पणियां:

Devenz Voice ने कहा…

https://devenzvoice.blogspot.com/2018/10/blog-post.html?m=1

Devenz Voice ने कहा…

https://devenzvoice.blogspot.com/2018/10/s-400.html?m=1

Bimal ने कहा…

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